12 अप्रैल 2020 - 14:15
क्या दुआ इलाज के मार्ग में सहायक है? दुआओं ने बीमारों को हौसलों के साथ दी नई ज़िन्दगी, दुआ के असर पर लगी मुहर

इस समय पूरी दुनिया कोरोना जैसे घातक वायरस से जूझ रही है। जहां पूरी दुनिया कोरोना वायरस की दवा बनाने का प्रयास कर रही है वहीं इलाज में दुआ के असर को लेकर भी शोध हो रहा है।

दुआ अर्थात प्रार्थना का संबंध किसी धर्म विशेष से नहीं है इंसान की आत्मा और ईश्वर के बीच संवाद को प्रार्थना कहतें हैं। दुआ को आसमानी धर्मों की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में से एक माना जाता है। क्योंकि पैग़म्बरों और ईश्वरीय दूतों द्वारा अपने पालनहार से संपर्क बनाने का रास्ता दुआ ही को माना जाता है। दुआ के माध्यम से समाजिक और व्यक्तिगत बदलाव और सुधार किया जा सकता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि दुआ का इतिहास इंसान के वजूद से भी पहले का है। दुआ के माध्यम से इंसान अपने पालनहार से संपर्क बनाता है और उससे अपने मन की बात करता है। वैसे तो दुआ और प्रार्थना हर धर्म में है लेकिन इसको आसमानी धर्मों में बहुत अधिक महत्व दिया गया है।

दुआ के बारे में कहा जाता है कि क्या दुआ के ज़रिए इंसान अपने भाग्य को बदल सकता है या इसके माध्यम से वह अपनी मुरादों को पा सकता है? इसी तरह यह भी सवाल होता है कि क्या इंसान दुआओं को ज़रिए व्यक्तिगत और सामाजि लिए एक उपकरण है? मुसलमानों में दुआ को इंसान और ईश्वर के बीच संपर्क का माध्यम माना जाता है। दुआ के ज़रिए इंसान अपनी सभी परेशानियों को अपने पालनहार से बयान करता है और अपने दिल की बात उससे करता है इसमें हर तरह की बात होती है। चाहे उसकी ज़रूरतें हो या फिर किसी भी तरह की आपदा या कठिनाईयां। इंसान अपनी कोशिशों के साथ-साथ अपने पालनहार से भी मदद की गुहार लगाता है।

यह स्पष्ट रूप से पश्चिमी समाजों में एक चुनौती है (हालांकि वे ख़ुद को बाइबल या तौरैत का अनुयायी मानते हैं) जिनकी भावना धर्मनिरपेक्ष या अधर्मी है, इस बिंदु पर को लेकर कभी-कभी उनके विचारकों के बीच एक दिलचस्प प्रवचन बन जाता है। समय-समय पर, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाएं इस सवाल को उठाती हैं कि क्या इंसान प्रार्थना के माध्यम से समस्याओं को दूर करने में सक्षम है? इसी संबंध में इटली जो इस समय कोरोना वायरस से बुरी तरह जूझ रहा है, वहां से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका ने अपने एक लेख में यही सवाल उठाया है कि, क्या दुआ किसी भी बीमारी और आपदा से मुक़ाबले में सहायता प्रदान करती है? इस पत्रिका में छपे लेख में आया है कि, कोई भी वैज्ञानिक अध्ययन निश्चितता के साथ यह साबित नहीं कर सकता है कि बीमारियों में ईमान और दुआ सहायक होती है। लेकिन कुछ स्थानों पर दुआ के ज़रिए लेकिन दुख-दर्द को कम होते देखा गया है।

इटली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका में “दुआ से इलाज” के शीर्षक के तहत छपे लेख के दूसरे भाग में आया है कि, दुआ के ज़रिए हृदय रोग के मरीज़ों के इलाज के संबंध में दो अध्ययन किए गए हैं, एक सैन फ्रांसिस्को में और दूसरा कान्सास सिटी में, जिसके परिणाम भी सामने आए हैं। इसी तरह इस अध्ययन को लगभग 4 हज़ार बीमारों पर किया गया है। पत्रिका के मुताबिक़, इस शोध के सकारात्मक नतीजे भी सामने आए हैं। बताया गया है कि जिस तरह एक मनोचिकित्सक अपने बीमारों का इलाज करते हैं और कई तरह की बीमारी उनके उपचार से ठीक भी होती है उसी तरह दुआ भी बीमारों पर असर करती है और देखा गया है कि कई रोगियों को दुआ के कारण काफ़ी हद तक ख़तरनाक से ख़तरनाक बीमारी से लड़ने की शक्ति प्राप्त हुई है और उन्होंने चिकित्सा के साथ-साथ दुआ के माध्यम से बीमारी को पराजित किया है। इस लिए शोधकर्ताओं का कहना है कि इंसान दुआ करे लेकिन इस बात का भी ध्यान रखे कि उसके साथ-साथ दवा भी खाए, जहां दवा उसकी बीमारियों को दूर करने में मदद करेगी वहीं दुआ उसको बीमारियों से मुक़ाबले मनोबल प्रदान करेगी।